World Leukemia Day 2025: हर साल 4 सितंबर को विश्व ल्यूकेमिया दिवस मनाया जाता है, जानें इतिहास, लक्षण और पूरी जानकारी
World Leukemia Day 2025: हर साल दुनिया भर में 4 सितंबर को विश्व ल्यूकेमिया दिवस (World Leukemia Day) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य है लोगों में ल्यूकेमिया (Leukemia) यानी रक्त कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना। यह बीमारी खून और अस्थि मज्जा (Bone Marrow) को प्रभावित करती है और तेजी से बढ़ने वाली घातक बीमारियों में गिनी जाती है। विश्व ल्यूकेमिया दिवस न केवल मरीजों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद जगाता है, बल्कि पूरी दुनिया को समय पर जांच और इलाज की अहमियत भी बताता है।
ल्यूकेमिया क्या है?
ल्यूकेमिया एक प्रकार का कैंसर है जो रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इसमें अस्थि मज्जा (Bone Marrow) असामान्य श्वेत रक्त कोशिकाएं (White Blood Cells) बनाने लगता है, जो सामान्य कोशिकाओं की जगह ले लेती हैं। ये कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने के बजाय शरीर को कमजोर कर देती हैं।
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इसे आमतौर पर “ब्लड कैंसर” भी कहा जाता है।
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यह बच्चों और वयस्कों दोनों में हो सकता है।
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इसकी पहचान समय पर हो तो इलाज संभव है।
विश्व ल्यूकेमिया दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व ल्यूकेमिया दिवस हर साल 4 सितंबर को मनाया जाता है।
इस दिन को मनाने की शुरुआत ल्यूकेमिया मरीजों की सहायता और इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हुई थी। इसका उद्देश्य है:
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लोगों को लक्षणों के बारे में जानकारी देना।
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जल्दी पहचान कर इलाज शुरू करने की प्रेरणा देना।
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मरीजों और उनके परिवारों को मानसिक और सामाजिक सहयोग देना।

विश्व ल्यूकेमिया दिवस 2025 की थीम
हर साल इस दिवस की एक विशेष थीम होती है, जो लोगों को इस बीमारी के खिलाफ जागरूक करने का संदेश देती है।
2025 की थीम: विश्व ल्यूकेमिया दिवस 2025 की कोई आधिकारिक थीम नहीं है। विश्व ल्यूकेमिया दिवस 2023 की थीम “ल्यूकेमिया आपके लिए क्या मायने रखता है?” (What Leukemia Means To You?) थी। इस थीम का उद्देश्य लोगों को ल्यूकेमिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने और यह समझाने के लिए प्रोत्साहित करना था कि यह बीमारी रोगियों और उनके परिवारों के जीवन को कैसे प्रभावित करती है।
ल्यूकेमिया का इतिहास
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1845 में पहली बार ल्यूकेमिया का जिक्र मेडिकल जर्नल्स में हुआ।
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20वीं सदी में इसके इलाज के लिए कीमोथेरैपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी तकनीकों का विकास हुआ।
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2000 के बाद से ल्यूकेमिया की दवाओं में कई नई खोज हुईं।
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आज भी यह दुनिया में होने वाली सबसे गंभीर बीमारियों में गिनी जाती है, लेकिन इलाज और जागरूकता से हजारों लोग हर साल ठीक भी हो रहे हैं।
ल्यूकेमिया कैसे होता है?
ल्यूकेमिया का सटीक कारण अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ जोखिम कारक (Risk Factors) इसे बढ़ा सकते हैं:
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आनुवंशिक कारण (Genetic Factors): परिवार में पहले से कैंसर का इतिहास होना।
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रेडिएशन का संपर्क: अत्यधिक विकिरण या रेडिएशन थेरेपी।
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कैंसर-उत्पादक रसायन (Carcinogens): बेंजीन जैसे हानिकारक रसायनों का लंबे समय तक संपर्क।
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कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: HIV या इम्यून सिस्टम की अन्य बीमारियां।
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आयु और लिंग: यह बीमारी बच्चों और बुजुर्गों में अधिक देखी जाती है, पुरुषों में थोड़ा ज्यादा खतरा होता है।
ल्यूकेमिया के लक्षण
ल्यूकेमिया के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं। लेकिन कुछ प्रमुख लक्षण हैं:
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अत्यधिक थकान और कमजोरी
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बार-बार बुखार या संक्रमण
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खून बहना या आसानी से चोट लगना
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वजन का तेजी से घटना
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हड्डियों और जोड़ों में दर्द
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त्वचा पर लाल या बैंगनी धब्बे (Petechiae)
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रात में अत्यधिक पसीना आना
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सांस फूलना और चक्कर आना
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
ल्यूकेमिया से बचाव के उपाय
ल्यूकेमिया को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ उपायों से इसके खतरे को कम किया जा सकता है:
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स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ: संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।
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धूम्रपान और शराब से बचें।
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रेडिएशन और हानिकारक रसायनों से दूर रहें।
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इम्यून सिस्टम मजबूत करें: विटामिन और प्रोटीन युक्त आहार लें।
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नियमित स्वास्थ्य जांच: खासकर अगर परिवार में कैंसर का इतिहास है।
ल्यूकेमिया का इलाज
ल्यूकेमिया का इलाज इसकी गंभीरता और प्रकार पर निर्भर करता है। इसमें मुख्यतः ये विकल्प अपनाए जाते हैं:
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कीमोथेरैपी (Chemotherapy): कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की दवा।
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रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy): रेडिएशन से असामान्य कोशिकाओं को नष्ट करना।
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बोन मैरो ट्रांसप्लांट: नई स्वस्थ कोशिकाएं शरीर में डालना।
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टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी: आधुनिक तकनीक से कैंसर कोशिकाओं पर सीधा असर।
विश्व ल्यूकेमिया दिवस हमें याद दिलाता है कि बीमारियों से बचाव जागरूकता से ही संभव है। ल्यूकेमिया के लक्षणों को पहचानकर समय पर जांच कराना जीवन बचा सकता है। इस दिन हमें न केवल मरीजों का समर्थन करना चाहिए, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर खुद और समाज को भी सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
इस विश्व ल्यूकेमिया दिवस 2025 पर संकल्प लें –
“लक्षण पहचानें, इलाज करवाएँ और जागरूकता फैलाएँ।”
डिस्कलेमर: यह आर्टिकल केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या बीमारी के लिए हमेशा योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ की सलाह लें।