मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – पार्वती के प्रेम की पूजा 

11th  july 2025

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यह ज्योतिर्लिंग शिव-पार्वती के अटूट प्रेम की प्रतीक है।  

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श्रीशैल पर्वत पर स्थित यह धाम दक्षिण भारत का आध्यात्मिक प्रवेशद्वार माना जाता है। 

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"मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – पार्वती के प्रेम की पूजा" जहां प्रेम और भक्ति का संगम मिलता है।

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कार्तिकेय और गणेश के विवाह के समय शिव-पार्वती का झुकाव गणेश  की ओर अधिक हो गया। इससे व्यथित होकर कार्तिकेय क्रोधित होकर क्रौंच पर्वत चले गए।

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कथा की शुरुआत 

पार्वती अपने पुत्र को मनाने चल पड़ीं। शिव भी उनके पीछे गए। पार्वती ने जहां शिव को पाया, वहीँ उन्होंने तप किया और शिव को मल्लिकार्जुन रूप में पाया।

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पार्वती का प्रेम 

मल्लिका = देवी पार्वती अर्जुन = भगवान शिव यह नाम बना उनके प्रेम और भक्ति का प्रतीक।

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शिव का मल्लिकार्जुन रूप 

श्रीशैल पर्वत पर स्थित शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों एक ही स्थान      पर — दुर्लभ योग तीर्थयात्रियों के लिए एक पवित्र संगम

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मंदिर की विशेषता 

यहां पूजा करने से विवाह में आने वाली      बाधाएं दूर होती हैं पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है

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आध्यात्मिक महत्व 

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