Vash 2 Movie Review: ‘वश 2’ हॉरर फिल्म जो सिर्फ डराती नहीं, बल्कि गहरी मैसेजिंग भी देती है

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Vash 2 Movie Review

Vash 2 Movie Review: सिनेमाघर में घना अंधेरा पसरा है। बीच-बीच में मोबाइल की रोशनी या दोस्तों की बातचीत ध्यान भटकाने की कोशिश करती है, मगर परदे पर जो दिख रहा है, उससे नज़र हटाना लगभग नामुमकिन है। एंड्रयू सैमुअल का बैकग्राउंड म्यूज़िक आपको एक पाश में कैद कर चुका है।

स्क्रीन पर एक मासूम स्कूल की बच्ची किसी लाश का सिर पत्थर से फोड़ रही है—हर एक चोट आपकी नसों तक असर करती है। गले में जैसे एक चीख अटक गई हो। कृष्णदेव याग्निक की ‘वश विवश लेवल 2’ यानी ‘वश 2’ ऐसे ही कई पलों से भरी हुई है।

‘वश 2’ की कहानी

यह फिल्म साल 2023 में आई ‘वश’ का सीक्वल है। अजय देवगन, आर. माधवन और ज्योतिका की फिल्म ‘शैतान’ असल में ‘वश’ का ही हिंदी रीमेक थी। लेकिन ‘वश 2’ केवल पिछली फिल्म की सफलता को भुनाने के लिए नहीं बनी। इसमें मेकर्स के पास एक ठोस कहानी और मजबूत मैसेज है।

‘वश 2’ की कहानी पिछली फिल्म की घटना के 12 साल बाद खुलती है। इस बार एक नामी गर्ल्स स्कूल की सभी बच्चियों को सम्मोहित कर लिया गया है। सवाल है—क्यों? और इसके पीछे की बर्बरता क्या है? यही फिल्म का असली प्लॉट है।

डर से आगे एक मैसेज

फिल्म सिर्फ आपको डराकर घर भेजने का इरादा नहीं रखती। यहां एक गहरा संदेश है। एक सीन में विलेन कहता है—
“स्त्री शक्ति सबसे महान नहीं। पुरुष और पुरुषार्थ ही ब्रह्म है।”

ये डायलॉग फिल्म की सोच और उसकी पॉलिटिक्स को सामने रखता है। फिल्म यह दिखाती है कि कैसे लड़कियों के आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता को कुचला जाता है।

असरदार सीन और निर्देशन

फिल्म में कई ऐसे सीन हैं जो आपको भीतर तक झकझोरते हैं।
जैसे—सम्मोहित बच्चियों के बीच एक लड़की को छींक आ जाती है। गुस्से में विलेन उसे “सांस रोकने” को मजबूर करता है। बैकग्राउंड में वो लड़की सांस की कमी से तड़प रही है, जबकि कैमरा फोकस मुख्य किरदारों पर है। फिर भी दर्शक के भीतर गुस्सा और असहजता भर जाती है।

डायरेक्टर कृष्णदेव याग्निक ने चाइल्ड एक्टर्स से बेहद असरदार काम करवाया है। जहां हल्की-सी ओवरएक्टिंग भी सीन को हास्यास्पद बना सकती थी, वहां फिल्म लगातार अपनी गंभीरता और इम्पैक्ट बनाए रखती है।

एक्टिंग और परफॉर्मेंस

जानकी बोदीवाला, हितू कनोडिया, हितेन कुमार और मोनल गज्जर सभी ने शानदार काम किया है। सभी कलाकारों ने फिल्म के थ्रिल और डर को जीवंत बनाया।

कमज़ोरियां

फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसकी पकड़ है। मगर अंत में क्लाइमैक्स को थोड़ी जल्दबाज़ी में निपटा दिया गया है। इससे थोड़ी निराशा होती है।

‘वश 2’ एक ग्रिपिंग हॉरर फिल्म है। यह सिर्फ डराती ही नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव और स्त्री-अस्मिता पर भी सवाल उठाती है। लंबे समय बाद एक ऐसी हॉरर फिल्म आई है जिसमें कहानी, डर और संदेश—सब एक साथ बखूबी गूंथे गए हैं।

अगर आप हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और साथ ही एक गहरी सोच वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो ‘वश 2’ मिस मत कीजिए।

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