तेज प्रताप यादव ने पार्टी-परिवार से अलगाव पर तोड़ी चुप्पी, बोले- कुछ जयचंद जैसे लालची लोग पार्टी में हैं

क्या RJD के अंदरूनी झगड़े अब खुलकर सामने हैं?
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। पार्टी और परिवार से अलग-थलग पड़ने की चर्चाओं के बीच तेज प्रताप ने भावनात्मक और आक्रामक दोनों सुर में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ लोग “जयचंद” की भूमिका निभा रहे हैं जो सिर्फ सत्ता और लाभ के लिए काम कर रहे हैं।
“कुछ जयचंद जैसे लालची लोग…” – तेज प्रताप का तंज
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया के ज़रिए एक वीडियो साझा करते हुए कहा:
“मैंने कभी भी पद या सत्ता की लालसा नहीं की, लेकिन आज पार्टी में कुछ ऐसे लोग हैं जो जयचंद की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्हें बस मलाई चाहिए, न विचारधारा से मतलब है, न संघर्ष से।“
तेज प्रताप का यह बयान तब आया है जब हाल ही में पार्टी के कई अहम निर्णयों में उनकी भूमिका नगण्य रही है और तेजस्वी यादव को स्पष्ट रूप से पार्टी का चेहरा माना जा रहा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: आरजेडी के अंदर चल रही खामोश खींचतान
RJD के अंदर तेजस्वी बनाम तेज प्रताप की लड़ाई कोई नई नहीं है। हालांकि तेजस्वी को लालू प्रसाद यादव का वारिस माना जाता है, लेकिन तेज प्रताप हमेशा से खुद को “संघर्षशील सिपाही” बताते आए हैं। उन्होंने कई बार पार्टी में चल रही अंदरूनी राजनीति पर सवाल उठाए हैं।
इस बार की बात अलग है — तेज प्रताप खुले तौर पर अपनी उपेक्षा और अपमान की बात कर रहे हैं, और वो भी तब जब लोकसभा चुनाव 2024 के बाद पार्टी के अंदर समीकरण बदलते दिख रहे हैं।
राजनीति से परे एक बेटे और भाई का दर्द
राजनीति से इतर, तेज प्रताप का बयान एक बेटे और भाई के दिल से निकली हुई बात जैसा लगता है।
बचपन से एक ही घर में पले, एक ही पार्टी में साथ लड़े दो भाइयों के बीच बढ़ती दूरी अब आम जनता को भी खलने लगी है।
पटना विश्वविद्यालय के छात्र राहुल मिश्रा कहते हैं:
“हमने 2015 में तेजस्वी और तेज को एक साथ देखा था। आज दोनों अलग-अलग मंचों पर बोलते हैं और नजरिए में फर्क साफ दिखता है। तेज प्रताप का गुस्सा कहीं न कहीं उनके अंदर के अकेलेपन का इशारा है।“
तेजस्वी यादव की चुप्पी, लालू की भूमिका पर भी सवाल
तेज प्रताप के बयान पर तेजस्वी यादव ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
RJD के अंदरूनी हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि लालू प्रसाद यादव की चुप्पी भी एक प्रकार की स्वीकृति मानी जा रही है। तेज प्रताप इससे पहले भी अपने पिता से मिलने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन कई बार उन्हें दरकिनार किया गया।
क्या अब अलग राह पर चलेंगे तेज प्रताप?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर तेज प्रताप को लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ा तो वे जल्द ही पार्टी से अलग होकर खुद का राजनीतिक मंच खड़ा कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने 2019 में ‘लालू के लाल’ मोर्चा बना कर संकेत दिया था।
बिहार में जातीय राजनीति और भावनात्मक जुड़ाव वाले चेहरों की अपनी अहमियत होती है — और तेज प्रताप अब उस भावना को खुलकर भुना सकते हैं।
