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Tehran Movie Review: जॉन अब्राहम की ‘तेहरान’ में देशभक्ति, सस्पेंस और सच्ची घटना का दमदार मेल

Tehran Movie Review

Tehran Movie Review : देशभक्ति, जासूसी और सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानियों के लिए अभिनेता जॉन अब्राहम की एक अलग ही पहचान बन चुकी है। चाहे बात हो ‘मद्रास कैफे’, ‘परमाणु’ या ‘सत्यमेव जयते’ की — हर बार उन्होंने राष्ट्रभक्ति को एक नए नजरिए से पेश किया है। इस फेहरिस्त में अब उनका नया नाम जुड़ चुका है: ‘तेहरान’

14 अगस्त 2025 को Zee5 पर रिलीज़ हुई यह फिल्म, एक ऐसी सच्ची घटना से प्रेरित है जिसने कभी देश की राजधानी को दहला दिया था — 2012 में दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के बाहर हुआ बम ब्लास्ट। इस घटना के पीछे के सच, इंटरनेशनल राजनीति के खेल और भारत की अनदेखी भूमिका को बेहद थ्रिलिंग अंदाज में पेश करती है ‘तेहरान’

क्या यह फिल्म सिर्फ एक थ्रिलर है या इसके पीछे कोई गहरी देशभक्ति की परतें छुपी हैं?
आइए जानते हैं इस दमदार फिल्म का पूरा रिव्यू और वो वजहें, जो इसे साल 2025 की सबसे चर्चित ओटीटी रिलीज में से एक बनाती हैं।

रिलीज डेट: 14 अगस्त 2025
📍 प्लेटफॉर्म: Zee5 (OTT)
🎬 समय: 1 घंटा 55 मिनट
🌍 भाषा: हिंदी
रेटिंग: 4/5

फिल्म का सारांश

जॉन अब्राहम की नई फिल्म ‘तेहरान’ देशभक्ति, इमोशन, थ्रिल और रियल घटनाओं से प्रेरित एक दमदार कहानी लेकर आई है। 2012 में दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के बाहर हुए धमाके की अनसुनी सच्चाई, भारत की भूमिका, और इस घटना से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय राजनीति को फिल्म में बेहद वास्तविक तरीके से पेश किया गया है।

कहानी क्या है?

“जब दो देश लड़ते हैं, तो तीसरे देश की शांति चुपचाप दफन हो जाती है…”

इस कहानी का नायक है राजीव कुमार (जॉन अब्राहम), दिल्ली पुलिस का एक इंटेंस ऑफिसर, जिसे एक मिशन के तहत तेहरान भेजा जाता है। साथ हैं – एसआई दिव्या राणा (मानुषी छिल्लर) और शैलेजा (नीरू बाजवा)।

इन तीनों का सामना होता है एक ऐसे जाल से, जिसमें सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि सिस्टम का असली चेहरा और बलिदान की कीमत भी छिपी है। कहानी तेजी से आगे बढ़ती है और एक सस्पेंस से भरे क्लाइमेक्स तक पहुंचती है।

तेहरान देखने के 5 बड़े कारण

  1. अनटोल्ड स्टोरी – 2012 के धमाके पर अब तक कोई फिल्म नहीं बनी थी।

  2. जॉन अब्राहम का जबरदस्त प्रदर्शन – इंटेंस, एक्शन और इमोशन तीनों में परफेक्ट।

  3. महिला किरदारों की दमदार मौजूदगी – मानुषी और नीरू दोनों ने प्रभावित किया।

  4. कट टू कट स्क्रीनप्ले – न कोई खिंचाव, न ही बेवजह की नाटकीयता।

  5. इंटरनेशनल जियो-पॉलिटिक्स – जो आज के समय में बेहद प्रासंगिक है।

डायरेक्शन और लेखन की बात करें तो…

निर्देशक अरुण गोपालन ने एक गंभीर विषय को सिनेमाई लार्जर दायरे में बिना भटके प्रस्तुत किया है। फिल्म में न ही ज़्यादा देशभक्ति का शोर है और न ही एक्शन का तमाशा। सब कुछ सधा हुआ और बुनियादी स्तर पर असलियत के करीब है।

डायलॉग्स जैसे —
“तुम अपनी जॉब से ज्यादा प्यार करती हो या देश से?” — सीधे दिल पर असर करते हैं।

कलाकारों का अभिनय

“तेहरान सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक मैसेज है – राजनीति के पीछे छिपे बलिदानों की कहानी।”

अगर आप देशभक्ति, थ्रिल और रियल स्टोरीज़ के फैन हैं, तो ‘तेहरान’ आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। बिना फालतू हाइप के यह फिल्म एक ऐसी कहानी कहती है, जो जरूरी है… और जिसे सुना जाना चाहिए।

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