Supreme Court Waqf Law Verdict 2025: सुप्रीम कोर्ट ने Waqf (Amendment) Act, 2025 के कुछ विवादित प्रावधानों (provisions) पर रोक (stay) लगा दी है, जबकि पूरे कानून को अभी बरकरार रखा गया है। चीफ़ जस्टिस बी.आर. गवाई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मुस्लिम पक्ष की कई दलीलें मान ली हैं। आइए जानते हैं फैसले की महत्वपूर्ण बातें।
फैसला कब और कैसे हुआ
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यह कानून संसद में पारित हो कर 8 अप्रैल, 2025 को लागू हुआ था।
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मुस्लिम संगठनों और व्यक्तियों ने यह दावा किया कि कानून के कुछ प्रावधान संविधान के खिलाफ हैं — ये प्रावधान धर्म की स्वतंत्रता, वक्फ संपत्तियों के अधिकार और सरकार के दायरे के मुद्दे उठाते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को तीन दिनों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
कोर्ट ने किन दलीलों को माना और किन प्रावधानों पर रोक लगाई गई
निचे वे प्रावधान हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक (interim stay) लगाई है:
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“5 वर्ष इस्लाम अभ्यास” की शर्त
कानून के उस हिस्से को रोक दिया गया है जिसमें यह लिखा है कि वक्फ बनाने वाला व्यक्ति कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम धर्म का अनुयायी और अभ्यासकर्ता होना चाहिए। कोर्ट ने कहा है कि इस तरह की शर्त बनने से पहले राज्य सरकारों को नियम बनाना चाहिए जिससे यह स्पष्ट हो सके कि “अभ्यासकर्ता होना” कैसे प्रमाणित किया जाएगा। बिना इस मैकेनिज्म के यह प्रावधान मनमाना हो सकता है। -
कलेक्टर या सरकारी अधिकारी को वक्फ संपत्ति संबंधी दावा तय करने का अधिकार
एक प्रावधान था कि कलेक्टर आदि अधिकारी यह निर्धारित कर सकेंगे कि वक्फ संपत्ति सरकारी भूमि से अतिक्रमण की दलील पर अतिक्रमणकारी है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रावधान भी रोक दिया है, क्योंकि यह “separation of powers” के सिद्धांत के खिलाफ है। -
वक्फ बोर्डों एवं परिषदों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या
कोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद (Central Waqf Council) में non-Muslim सदस्यों की अधिकतम संख्या 4 हो, और राज्य वक्फ बोर्डों (State Waqf Boards) में अधिकतम 3 non-Muslim सदस्य हों।
किन प्रावधानों पर कोर्ट ने अभी रोक नहीं लगाई
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वक्फ बोर्ड का CEO गैर-मुस्लिम हो सकता है, इस प्रावधान को फिलहाल बरकरार रखा गया है, हालांकि कोर्ट ने कहा है कि जहाँ संभव हो, CEO मुस्लिम व्यक्ति होना चाहिए।
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वक्फ संपत्तियों की पंजीकरण (registration) की शर्तों पर फ़िलहाल हस्तक्षेप नहीं किया गया है।
अदालत की राय और आधार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे अधिनियम को रोकने (stay) का कोई पर्याप्त आधार नहीं है क्योंकि संसद द्वारा पारित कानून को “presumption of constitutionality” की मान्यता मिलती है।
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कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि जब तक न्यायालय या ट्रिब्यूनल द्वारा वक्फ संपत्ति के टाइटल आदि मामलों पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक तीसरी-पक्ष (third party) अधिकार उत्पन्न ना हों।
आगे क्या होने की संभावना है?
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इन प्रावधानों के खिलाफ सुनवाई अब आगे बढ़ेगी; मुसलमान पक्ष उम्मीद कर रहे हैं कि अंतिम फैसले में भी ये रोक बनी रहे।
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राज्य सरकारों को निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे “5 वर्ष अभ्यास” की शर्त से जुड़े नियम बनाएँ। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रावधान में मनमानी ना हो।
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सरकार और अन्य पक्षों को इस बात की तैयारी करनी होगी कि कोर्ट किस तरह से संतुलन बनाएगा धार्मिक स्वतंत्रता, संपत्ति अधिकार, और सार्वजनिक हित के बीच।
