IIT स्नातक ने चलाया ₹65 करोड़ का पोंजी स्कैम: जानें क्या होती है पोंजी योजना और भारत के सुरक्षा उपाय

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पोंजी स्कीम kya h

बेंगलुरु में एक चौंकाने वाले घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। आईआईटी स्नातक और सेंट किट्स निवासी पर ₹65 करोड़ की पोंजी योजना चलाने का आरोप लगा है। इस धोखाधड़ी ने सैकड़ों निवेशकों की जिंदगी बर्बाद कर दी। आइए जानें पोंजी स्कीम क्या होती है, इसका इतिहास, इसकी खासियत और भारत में इसे रोकने के लिए बनाए गए कानून।

पोंजी स्कीम क्या है:

  • एक धोखाधड़ी वाली निवेश योजना है जिसके द्वारा कंपनी अपने निवेशकों को उच्च रिटर्न देकर जल्दी अमीर बनाने का वादा करती है।
  • नए निवेशकों के पैसे से पहले के निवेशकों को रिटर्न दिया जाता है।
  • यह योजना मौखिक प्रचार पर निर्भर करती है, क्योंकि नए निवेशक शुरूआती निवेशकों द्वारा अर्जित बड़े रिटर्न के बारे में सुनते है।
  • इसमें कोई वास्तविक लाभ कमाने वाली गतिविधि शामिल नहीं होती।
  • यह योजना पिरामिड के समान है, जिसमें दोनों ही नए निवेशकों के धन का उपयोग पहले के निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता है।पोंजी योजना शुरुआत के कुछ दिनों में यह नए निवेशकों से निवेश प्राप्त करके निवेशकों को अच्छे रिटर्न प्रदान करता है,इस के बाद जैसे ही ये बात मार्केट में फैल जाती है वैसे ही मार्केट में एक नए निवेशकों का एक नया समूह आकर्षित हो जाता है।
  • इस तरह के घोटाले के मुख्य उद्देश्य सीधे-साधे और मासूम लोगों को अपने जाल में फ़साना एवं धोखा देना है।
  • जब नए निवेश बंद हो जाते है या कई निवेशक निकासी की मांग करते है, तो यह अंतत: बंद हो जाती है।

नाम की उत्पत्ति:

  • इसका नाम एक सक्रिय चार्ल्स पोंजी नामक एक ठग के नाम पर रखा गया है,जो 1920 के दशक में एक गैर-मौजूद निवेश अवसर को बढ़ावा देकर करोड़पति बन गया।
  • उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मेल कूपन में निवेश के जरिए कुछ महीनों में 50% रिटर्न का वादा किया था।
  • नए निवेशकों के धन का उपयोग करके पुराने निवेशकों को भुगतान किया।

मुख्य विशेषताएँ:

  • कम या बिना किसी जोखिम के उच्च रिटर्न का वादा करना।
  • नए निवेशकों के निरंतर प्रवाह पर निर्भर अस्थिर मॉडल तथा इसमें कोई वैध व्यावसायिक गतिविधि या लाभ का स्रोत नहीं है।
  • नए निवेशकों को भर्ती करना या निकासी की मांगों को पूरा करना मुश्किल हो जाने पर यह बंद हो जाती है।
  • यह आमतौर पर मल्टी-लेवल मार्केटिंग योजनाएँ होती है, हालाँकि, भारत में मल्टी-लेवल मार्केटिंग आपने आप में अवैध नहीं है क्योंकि इसमें कोई उत्पाद बेचा जाता है। लेकिन डायरेक्ट मार्केटिंग कंपनियां पिरामिड या मनी सर्कुलेशन योजनाओं का प्रचार नहीं कर सकती है।
  • यह योजना प्राय: अधिक प्रतिभागियों को जोड़ने के लिए शुरूआती प्रतिभागियों को पुरस्कृत करने पर निर्भर करती है, लेकिन जब संभावित प्रतिभागियों की आपूर्ति कम हो जाती है तो यह योजना पूर्णत: बंद हो जाती है।

पोंजी योजना के लिए भारत द्वारा सुरक्षा उपाय:

  • पोंजी योजनाओं से घटित मामलों का धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भी निपटाया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त पोंजी योजनाओं पर पुरस्कार चिट एवं धन परिचालन अधिनियम, 1978 के तहत प्रतिबंध लगाया गया है, जो कि एक केंद्रीय अधिनियम है और राज्य सरकारों की एक प्रवर्तन एजेंसी है।
  • पोंजी योजनाओं की धोखाधड़ी वाली योजनाओं को रोकने के लिए अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 लागू किया गया है। –
  1. इस योजना के अंतर्गत निवारण के रूप में कार्य करने के लिए 1 वर्ष तक की कठोर सजा एवं 2 लाख से 50 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।
  2. यह उन मामलों में जमा राशि वापस लेने या वापस करने के लिए पर्याप्त प्रावधान है जहां जमा राशि अवैध रूप से जुटाई गयी हो, तथा इसमें यह भी उल्लेखित किया गया है कि बरामद धन पर पहला दावा जमाकर्ताओं का होगा।

एक और नया कदम

Q.1 पोंजी योजना का संबंध निम्नलिखित में से किसे है?
a) साइबर हमला
b) घोखाधड़ी निवेश घोटाला
c) ऑनलाइन गेम
d) मनी ट्रांसफर

Q.2 भारत में पोंजी योजना के विरुद्ध कौन- सा कानून नहीं है?
a) अधिनियम 1978
b) अधिनियम 2002
c) अधिनियम 1988
d) अधिनियम 2019

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