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किश्तवाड़ आपदा: चिशोती गांव में बादल फटने से 60 मौतें, 200 लापता

किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चिशोती गांव में वीरवार दोपहर बादल फटने और भूस्खलन ने तबाही का ऐसा मंजर छोड़ा, जिसे भुलाना मुश्किल है। इस आपदा में 60 लोगों की मौत, 120 घायल और 200 से ज्यादा लापता हैं। मलबे में अब भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जबकि राहत और बचाव कार्य में सेना, वायुसेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं।

किश्तवाड़ आपदा: चिशोती गांव में बादल फटने से 60 मौतें, 200 लापता

मचैल माता यात्रा पर पड़ा असर

चिशोती गांव प्रसिद्ध मचैल माता तीर्थयात्रा मार्ग का आखिरी पड़ाव है, जहां से 9,500 फीट ऊंचे मंदिर तक 8.5 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई शुरू होती है। घटना के समय यात्रा पर आए हजारों श्रद्धालु गांव में मौजूद थे। 25 जुलाई से चल रही यात्रा को तुरंत रोक दिया गया है और यात्रियों को जहां हैं, वहीं रुकने के निर्देश दिए गए हैं।

तबाही का मंजर

दोपहर 12 से 1 बजे के बीच हुई भारी बारिश ने चिशोती में आफत मचा दी।

लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मचैल माता यात्रा के लिए लगाए गए एक बड़े लंगर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जहां दर्जनों श्रद्धालु मौजूद थे।

मृतकों और घायलों की स्थिति

शुरुआत में 12 मौतों की खबर आई, जो शाम तक बढ़कर 41 और फिर रात में 60 तक पहुंच गई।

बचाव कार्य में सेना और वायुसेना सक्रिय

संभागीय आयुक्त रमेश कुमार के अनुसार,

मौसम खराब होने के कारण हेलिकॉप्टर से बचाव कार्य फिलहाल प्रभावित है, लेकिन जमीनी टीमें लगातार मलबा हटाने और लापता लोगों को खोजने में जुटी हैं।

बुनियादी ढांचे को नुकसान

इस आपदा में दो पुल बह गए, जिनमें से एक हाल ही में पीएमजीएसवाई के तहत बना था। पुल टूटने से मचैल और हमूरी गांव सहित कई इलाकों का संपर्क कट गया है। भोट नाला और चिनाब नदी उफान पर हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।

प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया

राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। मलबे से और शव निकलने की आशंका है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। प्रशासन ने आसपास के गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।

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