
Navratri Ashatmi Puja । मां महागौरी की व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को अपना पति पाने के लिए कठिन और लंबी तपस्या की। उन्होंने हजारों वर्षों तक कठोर साधना की, जिसमें उन्होंने जल और अन्न का सेवन बिलकुल बंद कर दिया। इस तपस्या के कारण उनका शरीर धीरे-धीरे काला पड़ गया और लोग उनकी इस कठोर साधना को देखकर आश्चर्यचकित हो गए। मां पार्वती की अटूट भक्ति और तपस्या से अत्यंत प्रभावित होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
तपस्या के समय उनके शरीर के काले पड़ने के कारण महादेव ने गंगा जल से उनका शुद्धिकरण किया। गंगा जल से स्नान करने के बाद उनका शरीर फिर से उज्ज्वल और चमकदार हो गया। इस अद्भुत परिवर्तन के कारण उन्हें महागौरी कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है ‘अत्यंत श्वेत और सौम्य देवी’। इस व्रत कथा से यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति, कठोर तपस्या और श्रद्धा से किसी भी कठिन लक्ष्य की प्राप्ति संभव है। इसलिए अष्टमी व्रत में मां महागौरी की विधिपूर्वक पूजा और प्रिय भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।