Navratri 2nd Day 2025: मां ब्रह्मचारिणी व्रत कथा, पूजा विधि, मंत्र और आरती

Navratri 2nd Day 2025: शक्ति का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि 2025 चल रहा है, जो इस साल 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। नवरात्रि का हर दिन दुर्गा देवी के नौ स्वरूपों को समर्पित होता है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा को अलग-अलग भोग चढ़ाए जाते हैं और भक्त विशेष रंग के वस्त्र धारण करते हैं।
आज नवरात्रि का दूसरा दिन है और यह दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। इस दिन विधिवत पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने का विशेष महत्व है।
मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ
मां ब्रह्मचारिणी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है।
पहला – ‘ब्रह्म’, जिसका अर्थ है तप, सत्य और परम शक्ति।
दूसरा – ‘चारिणी’, जिसका अर्थ है आचरण करने वाली या साधना करने वाली।
मां ब्रह्मचारिणी के शुभ रंग और पुष्प
मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन पूजा में सफेद रंग के कपड़े पहनें और मां को सफेद फूल अर्पित करें। इससे माता की प्रसन्नता बढ़ती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र और साधना मंत्र
नवरात्रि के दूसरे दिन, मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए बीज मंत्र “ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:” का जाप करना चाहिए। इसके साथ ही साधना मंत्र “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:” का कम से कम 108 बार जाप करने से माता की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते।।
या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन से हाथों में थोड़ी-सी मिश्री लेकर “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” मंत्र का 108 बार जाप करने से बच्चे में बुद्धि, मेधा और कार्यकुशलता बढ़ती है। इसे रोज़ाना सात दिनों तक करना चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि इस प्रकार है: प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थान को गंगा जल से शुद्ध करें। घर के मंदिर में दीपक जलाकर मां दुर्गा को अक्षत, सिंदूर और लाल फूल अर्पित करें। इसके बाद माता को भोग लगाएं। धूप व दीपक प्रज्वलित कर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में माता रानी की आरती करें।
मां ब्रह्मचारिणी के प्रिय भोग
द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी को बर्फी, चीनी, खीर और पंचामृत का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इन मिठाइयों से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपने आशीर्वाद की वर्षा करती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
मां ब्रह्मचारिणी का जन्म हिमालय में एक पुत्री के रूप में हुआ था. नारदजी के कहने पर उन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू की। इस कठिन साधना के कारण उन्हें तपश्चरिणी, यानी ब्रह्मचारिणी कहा गया। एक हजार सालों तक उन्होंने केवल फल और फूल खाए, सौ वर्षों तक जमीन पर रहकर कठिन जीवन व्यतीत किया। उन्होंने कठिन उपवास रखे, खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप सहा. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाकर भगवान शंकर की आराधना की. इसके बाद उन्होंने सूखे बिल्व पत्र भी नहीं खाए और कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार तपस्या करती रहीं। पत्तों को छोड़ देने के कारण उन्हें अपर्णा नाम से भी जाना गया। उनकी कठोर तपस्या देखकर देवता, ऋषि हैरान रह गए और कहा कि ऐसा तप कोई और नहीं कर सका. देवताओं ने देवी से कहा की उनकी मनोकामना पूरी होगी और भगवान शंकर उन्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। इस कथा का संदेश यह है कि जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से साधक को सफलता प्राप्त होती हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन इसी स्वरूप की पूजा की जाती है।
संदेश: यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, धैर्य और संयम से उन्हें पार किया जा सकता है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से भक्त को सफलता और सुख की प्राप्ति होती है।
ब्रह्मचारिणी माता की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।।
नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना और तपस्या से प्रेरणा लेने का दिन है। उनकी पूजा करने से साहस, धैर्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। lifeofindian.in इसकी पुष्टि नहीं करता है।
