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National Nutrition Week 2025: राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर जानें डॉक्टर की सलाह – पारंपरिक आहार से दूर करें हिडन हंगर और मालन्यूट्रिशन

National Nutrition Week 2025

National Nutrition Week 2025: हर साल 1 से 7 सितंबर तक भारत में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (National Nutrition Week) मनाया जाता है। आज इसका समापन है और इसका उद्देश्य लोगों को सही खान-पान और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूक करना है। इस अवसर पर देशभर में स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर लोगों को यह संदेश देते हैं कि पारंपरिक भारतीय आहार और जीवनशैली को अपनाकर न केवल बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि ‘हिडन हंगर’ और ‘मालन्यूट्रिशन’ जैसी गंभीर समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है।

नोएडा के सीएचसी भंगेल में सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक ने भी इसी दिशा में जागरूकता फैलाते हुए बताया कि पारंपरिक भारतीय भोजन हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना आवश्यक है और यह आधुनिक प्रोसेस्ड फूड की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी साबित होता है।

पारंपरिक भारतीय आहार का महत्व

भारतीय भोजन की थाली में रोटी, दाल, चावल, सब्जी, रायता, छाछ और मौसमी फल शामिल होते हैं। यह भोजन न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने और ऊर्जा देने के लिए जरूरी हैं।

डॉ. पाठक का कहना है कि कुछ लोग पारंपरिक भोजन में गुड़ के लड्डू या अन्य मिठाइयाँ भी जोड़ लेते हैं, लेकिन असली पारंपरिक आहार वही है, जिसमें ताजे और प्राकृतिक तत्व शामिल हों।

शहरी और ग्रामीण महिलाओं में आहार का अंतर

डॉ. पाठक ने बताया कि शहरी और ग्रामीण महिलाओं की आहार आदतों और जीवनशैली में बड़ा फर्क देखने को मिलता है।

शहरी महिलाएं

ग्रामीण महिलाएं

हिडन हंगर और मालन्यूट्रिशन क्या है?

ये समस्याएं खासकर महिलाओं और बच्चों में अधिक देखने को मिलती हैं। हिडन हंगर की वजह से शरीर कमजोर हो जाता है, थकान जल्दी लगती है, हड्डियां कमजोर होती हैं और बार-बार बीमारियां घेर लेती हैं।

डॉक्टर की सलाह : माइंडफुल ईटिंग और संतुलित जीवनशैली

डॉ. मीरा पाठक ने महिलाओं को सचेत खान-पान अपनाने की सलाह दी। उनका कहना है कि:

समाधान की ओर कदम

  1. जागरूकता बढ़ाना – महिलाओं और बच्चों को पोषण के महत्व के बारे में शिक्षित करना।

  2. संतुलित आहार अपनाना – मौसमी फल, ताजे सब्जियां और पारंपरिक भोजन को प्राथमिकता देना।

  3. सामाजिक बदलाव – परिवार में महिलाओं के लिए पोषण को उतना ही जरूरी मानना जितना बाकी सदस्यों के लिए।

  4. कानूनी और सरकारी पहल – सरकार द्वारा चलाए जा रहे पोषण कार्यक्रमों का लाभ लेना।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का संदेश सिर्फ एक सप्ताह तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जीवनभर अपनाना चाहिए। डॉ. मीरा पाठक की सलाह साफ है कि पारंपरिक भारतीय आहार, संतुलित जीवनशैली और तनावमुक्त रहना ही स्वास्थ्य और दीर्घायु की कुंजी है।

महिलाओं के लिए यह और भी जरूरी है, क्योंकि वे न सिर्फ परिवार की देखभाल करती हैं बल्कि अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य की नींव भी रखती हैं। अगर महिलाएं जागरूक होकर सही पोषण लेंगी, तो आने वाला कल स्वस्थ और सशक्त होगा।

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