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Margashirsha Purnima 2025: साल की अंतिम पूर्णिमा पर पढ़े तुलसी चालीसा, इस पाठ से मिलते हैं अद्भुत फल

साल की अंतिम पूर्णिमा पर पढ़े तुलसी चालीसा

Margashirsha Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है, और मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व तो इससे भी अधिक बढ़ जाता है। साल की अंतिम पूर्णिमा होने के कारण यह तिथि विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। खासतौर पर तुलसी पूजा और तुलसी चालीसा का पाठ करने से धन, समृद्धि और घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

इस वर्ष Margashirsha Purnima 2025 गुरुवार, 4 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025: तिथि और समय

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर तुलसी पूजा और चालीसा पाठ का महत्व

तुलसी को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र स्थान दिया गया है। तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है, और माना जाता है कि जहां तुलसी का वास होता है, वहां लक्ष्मी निवास स्वयं करती हैं।

इस दिन तुलसी पूजा करने और तुलसी चालीसा का पाठ करने से साधक को विशेष कृपा मिलती है।

तुलसी चालीसा का पाठ करने के प्रमुख लाभ

तुलसी पूजा कैसे करें? (पूजा-विधि)

  1. सुबह स्नान कर स्वयं को शुद्ध करें।

  2. तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं।

  3. गंगाजल छिड़कें और स्वच्छ जल अर्पित करें।

  4. चंदन, फूल और अक्षत चढ़ाएं।

  5. “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें।

  6. इसके बाद सच्चे मन से तुलसी चालीसा का पाठ करें।

  7. अंत में आरती करें और भगवान विष्णु-लक्ष्मी का ध्यान करें।

।।तुलसी चालीसा।।

श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।

जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।

दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।

विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।

भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।

जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।

करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।

कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।

तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।

कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।

वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।

श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।

कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।

छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।

तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।

औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,

देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।

वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।

नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।

नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।

नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।

नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।

नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।

नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।

जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।

निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।

करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।

शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।

क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।

मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।

जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।

बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।

प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।

चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।

करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।

पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।

यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।

करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।

है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।

भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।

यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।

गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

साल की आखिरी पूर्णिमा पर यह पाठ क्यों है विशेष?

कहते हैं कि साल की अंतिम पूर्णिमा पर किए गए पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है। मार्गशीर्ष मास स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना माना जाता है। तुलसी चालीसा का पाठ करने से घर में बनी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

अगर आप नया साल धन, सफलता और शांति के साथ शुरू करना चाहते हैं, तो यह दिन आपके लिए अत्यंत शुभ है।

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