Site icon LIFE OF INDIAN

Jitiya Vrat 2025: इस बार सिर्फ 24 घंटे का होगा जितिया व्रत, जानें पारण का समय

Jitiya Vrat 2025

Jitiya Vrat 2025: सनातन धर्म में जितिया व्रत का बहुत ही खास महत्व है। यह व्रत हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की रक्षा होती है और उनकी आयु लंबी होती है। माताएं इस व्रत को निर्जला उपवास रहकर करती हैं और ईश्वर से अपने पुत्र की दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

इस बार कितना लंबा होगा व्रत?

पिछले कई वर्षों से जितिया व्रत 36 घंटे या 72 घंटे तक का होता रहा है, जिसके कारण माताओं को लंबे समय तक उपवास करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। निर्जला व्रत होने के कारण कई महिलाएं डिहाइड्रेशन का शिकार भी हो जाती थीं। लेकिन इस बार व्रत करने वाली महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है।

पंडित मनोत्तपल झा के अनुसार, इस बार का जितिया व्रत केवल 24 घंटे का ही होगा। यानी व्रती माताओं को सिर्फ एक दिन और एक रात तक उपवास करना होगा।

जितिया व्रत 2025 की तिथि और पारण का समय

इस बार व्रत आसान होगा और महिलाएं आराम से इसे निभा सकेंगी।

जितिया व्रत का महत्व

  1. संतान की दीर्घायु – इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पुत्र की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करना है।

  2. कठिन तपस्या – निर्जला उपवास होने के कारण इसे सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है।

  3. धार्मिक मान्यता – कहा जाता है कि इस व्रत को करने से पुत्र पर आने वाले संकट टल जाते हैं और उसे स्वस्थ जीवन मिलता है।

जितिया व्रत की पूजा विधि

धार्मिक कथा

जितिया व्रत से जुड़ी कथा जीमूतवाहन की है। मान्यता है कि उन्होंने एक नागराज के पुत्र को गरुड़ से बचाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। उनके त्याग और बलिदान के प्रतीक रूप में इस व्रत को किया जाता है। इससे माताएं अपनी संतान की रक्षा और लंबी उम्र की कामना करती हैं।

जितिया व्रत 2025 महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है क्योंकि इस बार उन्हें 36 या 72 घंटे नहीं, बल्कि केवल 24 घंटे का उपवास करना होगा। यह आसान जरूर है, लेकिन इसकी धार्मिक महत्ता उतनी ही गहरी है। संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए किया जाने वाला यह व्रत मातृत्व के गहरे प्रेम और त्याग का प्रतीक है।

Exit mobile version