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International Literacy Day 2025: 8 सितंबर को क्यों मनाया जाता है विश्व साक्षरता दिवस? जानें पूरी जानकारी

ज्ञान ही शक्ति है और शिक्षा ही विकास का आधार – इसी सोच को मज़बूत करने के लिए हर साल 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस (International Literacy Day) मनाया जाता है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का सही तरीका और सामाजिक समानता का सबसे बड़ा साधन है।

भारत में भी इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है। सरकार सर्व शिक्षा अभियान, नवभारत साक्षरता कार्यक्रम, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं के ज़रिए हर नागरिक तक शिक्षा पहुँचाने का प्रयास कर रही है।

“साक्षरता केवल शब्दों को पढ़ने-लिखने की क्षमता नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को स्वतंत्र सोचने, समझने और अपने अधिकारों के लिए खड़ा होने की शक्ति देती है।”
UNESCO

International Literacy Day 2025

साक्षरता क्या है?

साक्षरता का अर्थ सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि पढ़ने-लिखने और समाज में बेहतर जीवन जीने की क्षमता है। आज के डिजिटल युग में साक्षरता का मतलब डिजिटल शिक्षा को भी शामिल करता है।

साक्षरता दिवस का इतिहास

8 सितंबर चुनने का कारण यह भी था कि कई देशों में यह नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत का समय होता है।

क्या है यूनेस्को का दृष्टिकोण?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूनेस्को का उद्देश्य शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के जरिए दुनिया में शांति स्थापित करना था। तेहरान सम्मेलन ने इस दिशा में एक ठोस शुरुआत की और 26 अक्टूबर 1966 को आधिकारिक घोषणा के साथ 1967 से हर साल इसका आयोजन होने लगा।

समय के साथ यह दिवस सतत विकास लक्ष्य (SDG 4: सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) से भी जुड़ गया। हर साल इस दिन को अलग-अलग विषयों के साथ मनाया गया है जैसे वयस्क साक्षरता, डिजिटल युग में साक्षरता, समावेशन और लैंगिक समानता।

साक्षरता दिवस का महत्व

साक्षरता दिवस 2025 की थीम

“डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना”
(Enhancing Literacy in the Digital Era)

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 की थीम है ‘डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना’। इसके पहले साल 2024 साक्षरता दिवस की थीम “बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना: आपसी समझ और शांति के लिए साक्षरता” थी।

भारत की साक्षरता दर 2025 तक

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 हमें यह याद दिलाता है कि ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है और शिक्षा ही विकास, समानता और सशक्तिकरण का वास्तविक आधार है।
UNESCO द्वारा 1966 में शुरू की गई यह पहल आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि शिक्षा के बिना न तो समाज में समान अवसर संभव हैं और न ही आर्थिक और सामाजिक विकास।

भारत ने पिछले वर्षों में साक्षरता दर बढ़ाने में सराहनीय प्रगति की है, लेकिन अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब वर्गों और महिलाओं तक शिक्षा पहुँचाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। डिजिटल युग में अब केवल अक्षरज्ञान ही नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता भी आवश्यक है।

इसलिए, साक्षरता दिवस केवल एक औपचारिक दिन नहीं, बल्कि यह एक संकल्प है कि हम सभी मिलकर शिक्षा को हर व्यक्ति तक पहुँचाएँ, ताकि कोई भी अज्ञानता और निरक्षरता के अंधकार में न रहे। यही असली श्रद्धांजलि होगी इस दिवस के महत्व को।

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