हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण भगवान गणेश की मूर्ति को शुभ मुहूर्त में घर या पंडाल में स्थापित करते हैं और दस दिनों तक विधिपूर्वक पूजा करते हैं। इस वर्ष 2025 में गणेश चतुर्थी 27 अगस्त (बुधवार) को पड़ रही है। यदि आप भी इस शुभ अवसर पर गणपति बप्पा को अपने घर ला रहे हैं, तो मूर्ति स्थापना से जुड़े नियमों और विधियों को जानना बेहद जरूरी है।
गणेश मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त
पौराणिक मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न काल में भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसीलिए इसी समय को मूर्ति स्थापना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
शुभ समय – सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
इस अवधि में भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करना बेहद शुभ माना जाता है और इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मूर्ति लाने से पहले ध्यान रखें ये बातें
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पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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भगवान गणेश की मूर्ति लाते समय उनकी आंखों पर लाल कपड़ा बांध दें।
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पूरे श्रद्धा भाव के साथ ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच गणपति बप्पा का घर में स्वागत करें।
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मूर्ति को घर में लाते समय पुष्पवर्षा करना बेहद शुभ माना जाता है।
मूर्ति स्थापित करने की दिशा और स्थान
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घर में उत्तर दिशा को मूर्ति स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
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मूर्ति को ऐसी जगह रखें जहां भगवान गणेश का चेहरा साफ दिखे और मूर्ति की पीठ किसी भी स्थिति में सामने न हो।
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स्थापना स्थल पर पहले गंगाजल छिड़कें, फिर स्वच्छ चौकी पर लाल या पीले कपड़े को बिछाकर स्वास्तिक बनाएं और उस पर अक्षत (चावल) व फूल चढ़ाएं।
गणपति स्थापना की विधि
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मूर्ति स्थापना के स्थान को अच्छे से साफ करें और गंगाजल से शुद्ध करें।
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लकड़ी की चौकी पर कपड़ा बिछाकर स्वास्तिक बनाएं और चावल व पुष्प चढ़ाएं।
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भगवान गणेश के साथ एक कलश की भी स्थापना करें।
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भगवान गणेश के 108 नामों का जाप करें।
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धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य आदि से विधिपूर्वक पूजा करें।
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अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें और 21 मोदक का भोग लगाएं।
कितने दिनों तक रखें गणपति बप्पा?
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गणेश उत्सव पर भगवान गणेश की मूर्ति को 1.5, 5, 7, 11 या 21 दिनों के लिए घर में रखा जाता है।
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11वें दिन अनंत चतुर्दशी पर विधिवत विसर्जन किया जाता है।
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मान्यता है कि अधिक दिन बप्पा को घर में रखने से अधिक समय तक उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
संकल्प मंत्र
व्रत या पूजन से पहले संकल्प लें:
“मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायकपूजनमहं करिष्ये।”
(अर्थात मैं अपने सभी कार्यों की सिद्धि के लिए सिद्धिविनायक पूजन कर रहा/रही हूं।)
गणेश चतुर्थी का पर्व केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाला त्योहार भी है। अगर आप नियमों का पालन करते हुए विधिपूर्वक गणेशजी की स्थापना करते हैं, तो न केवल घर में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि भगवान गणेश की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।
