दिवाली से पहले बड़ा तोहफा: GST में ऐतिहासिक बदलाव, खत्म होंगे 12% और 28% के स्लैब

नई दिल्ली: देशवासियों के लिए इस दिवाली खुशखबरी आने वाली है। केंद्र सरकार ने GST (वस्तु एवं सेवा कर) के ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत 12% और 28% के मौजूदा टैक्स स्लैब को खत्म कर केवल 5% और 18% के दो प्रमुख स्लैब रखे जाएंगे। इस कदम का सीधा असर आम जनता, व्यापारियों और छोटे उद्योगों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई में कमी आने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में संकेत देते हुए कहा,

“पिछले 8 वर्षों में GST को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अब समय है कि हम इसे और जन-हितैषी बनाएं। इस दिवाली हम देशवासियों को महंगाई से राहत देने वाला बड़ा तोहफा देने वाले हैं।”

बदलाव क्यों जरूरी है?

GST को जुलाई 2017 में लागू किया गया था, जिसका मकसद पूरे देश में टैक्स स्ट्रक्चर को एक जैसा बनाना और टैक्स चुकाने की प्रक्रिया को आसान करना था। हालांकि, समय के साथ इसमें कई दरें और कैटेगरी जुड़ती चली गईं, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को भ्रम होने लगा।

वर्तमान में 0%, 5%, 12%, 18% और 28% के मुख्य स्लैब हैं। इसके अलावा, सोना-हीरे जैसी वस्तुओं पर अलग से टैक्स दरें लागू होती हैं। 12% और 28% के स्लैब को खत्म करने के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे टैक्स स्ट्रक्चर सरल होगा, टैक्स चोरी की संभावना घटेगी और बाजार में मांग बढ़ेगी।

क्या होगा नया ढांचा?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित बदलाव के बाद GST का नया ढांचा इस प्रकार होगा—

  • 0% स्लैब: अनाज, दूध, सब्जियों जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें

  • 5% स्लैब: 12% स्लैब में आने वाले 99% उत्पाद जैसे कपड़े, पैकेज्ड फूड, फुटवियर

  • 18% स्लैब: 28% स्लैब में आने वाले 90% उत्पाद जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, ब्यूटी प्रोडक्ट्स

  • 40% स्लैब (विशेष): तंबाकू, पान मसाला, शराब जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पाद

किन चीजों के दाम घटेंगे?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो मोबाइल फोन, टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, फर्नीचर, कार टायर, पेंट, ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसी वस्तुओं की कीमत में सीधी गिरावट आएगी। वहीं, पैकेज्ड फूड, कपड़े और फुटवियर पहले से ज्यादा सस्ते हो सकते हैं।

आम आदमी को कितना फायदा?

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 28% से 18% और 12% से 5% पर जाने से उपभोक्ताओं को 10% से 15% तक की सीधी बचत हो सकती है। त्योहारी सीजन में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा, क्योंकि यही वह समय है जब लोग इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और सजावट के सामान की खरीदारी करते हैं।

छोटे उद्योगों और व्यापारियों के लिए क्या मायने?

कम GST दरों का सीधा फायदा छोटे उद्योगों को मिलेगा।

  • उत्पादन लागत घटेगी

  • प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी

  • मांग में इजाफा होगा

  • टैक्स चोरी की प्रवृत्ति में कमी आएगी

सरकार का मानना है कि इससे न केवल छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की GDP ग्रोथ में भी तेजी आएगी।

राजनीतिक और आर्थिक असर

दिवाली से पहले इस तरह का बड़ा टैक्स सुधार निश्चित रूप से राजनीतिक रूप से भी अहम है। चुनावी साल में टैक्स दरें घटाना जनता के बीच सकारात्मक संदेश देगा। वहीं, आर्थिक मोर्चे पर इससे महंगाई पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।

राज्यों का रुख

GST एक साझा टैक्स प्रणाली है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की सहमति जरूरी होती है। प्रस्ताव अब GST काउंसिल के ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) के पास भेजा गया है। GoM इसकी व्यवहार्यता, राज्यों की राजस्व हानि और संभावित मुआवजे के तरीकों पर विचार करेगा।

कब से लागू होगा?

अगर सितंबर-अक्टूबर में होने वाली GST काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो नए GST स्लैब इस साल दिवाली से पहले लागू हो सकते हैं। विशेष रूप से सिन गुड्स पर 40% टैक्स का प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू होने की संभावना है।

क्या चुनौतियां आ सकती हैं?

  • राज्यों के राजस्व में अस्थायी कमी

  • टैक्स दरों के बदलाव के बाद IT सिस्टम में बदलाव

  • व्यापारियों को नई दरों की जानकारी और बिलिंग सॉफ्टवेयर अपडेट करना

  • बाजार में पुराने स्टॉक और नए रेट के बीच असमानता

GST स्लैब में यह बदलाव एक ऐतिहासिक कदम हो सकता है। इससे जहां आम आदमी की जेब पर बोझ कम होगा, वहीं छोटे उद्योगों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। हालांकि, यह तभी संभव होगा जब केंद्र और राज्य मिलकर इसे जल्द लागू करने का फैसला लें। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो इस दिवाली महंगाई से राहत और सस्ते दामों पर खरीदारी का डबल तोहफा मिल सकता है।

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