
Cloudburst: बादल फटना एक ऐसी घटना है जो पिछले कुछ दिनों से पुरे भारत में अलग-अलग जगह पर हो रही है। अक्सर भारत में, पूर्वोतर और उच्च एवं मध्य हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में, विशेष रूप से जून और जुलाई के महीने में होती है, जब दक्षिण-पशिचमी मानसूनी हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आती है, तभी बादल फटने की घटनाएँ ज्यादातर होती है। ये हवाएं अक्सर मैदानी इलाकों को दरकिनार कर सीधे उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों की ओर बढ़ जाती है।
बादल फटना (cloudburst) क्या है?
- यह एक प्राकृतिक मौसमी घटना है जिसमें बहुत ही कम समय में किसी छोटे क्षेत्र में भारी मात्रा में अत्यधिक वर्षा होती है, जिससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी विनाशकारी स्थितियां उत्पन्न हो जाती है।
- यह घटना मुख्य रूप से भू-भाग और ऊंचाई के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक घटित होती है, इसमें कभी-कभी ओले व तेज गरज के साथ मूसलाधार बारिश भी होती है।
- यह लगभग 20-30 वर्ग किमी. के भौगोलिक क्षेत्र में 100 मिमी./घंटा से अधिक अप्रत्याशित वर्षा के साथ एक मौसमी घटना है।
- इसी के साथ जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे ही वातावरण अधिक- से-अधिक नमी धारण कर लेता है और यह नमी कम अवधि में बहुत तीव्र वर्षा का कारण बनती है, जिसके परिणामस्वरूप पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आ जाती है कभी-कभी स्थिति इतनी भयाभय हो जाती है कि पहाड़ों के किनारे बसे शहरों तक में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
बादल फटने (cloudburst) के कारण:
- यह घटना आमतौर पर तब शुरू होती है जब नमी से भरे बादल, गर्म हवा के तेज उपर की ओर प्रवाह के कारण वर्षा नहीं कर पाते है, इन प्रवाहों के कारण वर्षा की बूंदे प्रथ्वी पर गिरने की बजाय बड़ी होकर ऊपर उठ जाती है।
- इसी प्रकार जब वर्षा की बूंदे अस्थायी रूप से एक स्थान पर रुक जाती है, जिससे भारी मात्रा में नमी एकत्र हो जाती है। अंत में ये बहुत ही कम समय में एक छोटे से क्षेत्र में अचानक और तेज बारिश हो जाती है। कभी-कभी इसमें गरज और ओलावृष्टि भी शामिल होती है।
- यह निम्न दाब क्षेत्रों के कारण पहाडियों और पर्वतों जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्राय ज्यादा होता है।
प्रभाव:
- पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाएँ विनाशकारी होती है इससे जान-माल का भारी नुकसान होता है, क्योंकि अधिकांश पानी घाटियों और नालों में एकत्रित हो जाता है।
- बादल फटने से भूमि अवतलन, या प्रथ्वी का अचानक धंसना, एक प्रमुख परिणाम है, जो प्राय: अत्यधिक जल अवशोषण के कारण भूमि के कमजोर होने के कारण होता है।
- अचानक भारी बारिश से नदियों और नालों में पानी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
- बादल फटने से उस विशेष क्षेत्र की वनस्पतियों और जीव-जन्तुओ तथा सार्वजानिक उपयोगिताओं को भी भारी नुकसान होता है।
- कभी-कभी भारी बारिश से मलबे और मिट्टी का तेज बहाव पानी की भारी मात्रा के साथ मिलकर और भी खतरनाक हो जाता है जिससे भूस्खलन जैसी आपदा उत्पन्न हो जाती है, जो अपने तेज बहाव से रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा कर ले जाता है।
पूर्वानुमान:
- बादल फटना जैसी आपदा का अनुमान लगाने के लिए वर्तमान में कोई भी तकनीक उपलब्ध नही है, हालाँकि इससे भारी वर्षा की संभावना वाले क्षेत्र में इसका पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
- बादल फटने को 60 मिनट के भीतर 10 सेमी या 100 मिमी से अधिक वर्षा से मापा जाता है।
- इस घटना का पता लगाना तो मुश्किल है क्योंकि ये घटना एक छोटे से क्षेत्र में होती है, लेकिन भारी बारिश के दौरान या ऐसा अनुमान लगाना की बादल फटने जैसी घटना हो सकती है तब ये सलाह दी जाती है कि आपदा के पूर्व ही आवश्यक सावधानियां बरती जाने से जान-माल को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है।
बादल फटना एक भू-जल विज्ञानीय घटना है जो प्रकृति की आक्रामता और वर्षा से होने वाली तबाही का पैमाना है ये कभी-कभी भयावह भी हो सकता है। अक्सर हिमालयी क्षेत्र में बादल फटने की सबसे आधिक घटनाएँ देखने को मिलती है,क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में दशकीय तापमान वृद्धी वैश्विक तापमान वृद्धी की दर से अधिक है।