क्या टूट गया अमेरिका का घमंड? मुरादाबाद की जनता ने दे दिया जवाब- भारत को अब किसी की ज़रूरत नहीं

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क्या टूट गया अमेरिका का घमंड? मुरादाबाद की जनता ने दे दिया जवाब- भारत को अब किसी की ज़रूरत नहीं

मुरादाबाद। चीन की हालिया विक्ट्री डे परेड ने वैश्विक राजनीतिक और सैन्य समीकरणों को हिला कर रख दिया है। चीन ने इस परेड में अपने अत्याधुनिक न्यूक्लियर हथियारों और मिसाइलों का प्रदर्शन कर यह साफ कर दिया कि वह अब अमेरिका के बराबर खड़ा है। मुरादाबाद के स्थानीय लोग भी इस विषय पर अपनी राय रख रहे हैं और उनका मानना है कि चीन ने अमेरिका के सुपर पावर वाले घमंड को तोड़ दिया है। साथ ही, भारत की सैन्य ताकत और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दिखाए गए साहस ने भी यह संदेश दिया है कि भारत भी वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

चीन की विक्ट्री डे परेड और वैश्विक सियासत पर असर

दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के 80 साल पूरे होने के अवसर पर चीन ने बड़ी शान और शौकत से विक्ट्री डे परेड मनाई। इस बार की परेड को चीन की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य परेड माना जा रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग के थियानमेन चौक पर इस परेड की सलामी ली। इस कार्यक्रम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन समेत दुनिया के 25 देश के बड़े नेता शामिल हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने इस परेड के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह अब अमेरिका का वैकल्पिक सुपरपावर बन चुका है और गैर-पश्चिमी देशों के नेतृत्व की क्षमता रखता है। परेड में लेजर हथियार, स्टील्थ जेट, मिसाइल, ड्रोन, रोबोटिक डॉग्स जैसे अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन हुआ, जो अमेरिका के लिए चिंता का सबब बन गए हैं।

मुरादाबाद के लोगों की राय

चीन ने अमेरिका का घमंड तोड़ा – अभिषेक शर्मा

स्थानीय निवासी अभिषेक शर्मा कहते हैं,
“चीन ने हाल ही में अपनी सैन्य ताकत दिखाकर पूरी दुनिया को साफ संदेश दिया है कि अब वह अमेरिका के बराबर खड़ा है। यह परेड अमेरिका के टैरिफ वार का जवाब है। चीन ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अपने न्यूक्लियर हथियारों का प्रदर्शन किया, जो साफ संकेत है कि साउथ ईस्ट एशिया में कौन ज्यादा ताकतवर है।”

अभिषेक आगे कहते हैं कि,
“चीन किसी भी विवाद से पीछे हटने वाला नहीं है, जबकि भारत को शांति, संस्कृति और अमन-चैन का संदेश देना चाहिए। लेकिन सैन्य दृष्टिकोण से देखा जाए तो चीन की ताकत लगातार बढ़ रही है और यही अमेरिका को असहज कर रही है।”

भारत को अमेरिका पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं – अंजली शर्मा

अंजली शर्मा के अनुसार,
“चीन की इस परेड में इतने देशों के नेताओं का आना दर्शाता है कि साउथ एशिया के कई देश चीन के साथ खड़े हैं। अमेरिका खुद को सबसे ताकतवर बताता है, लेकिन हकीकत में चीन ने अपनी संस्कृति, एकता और सैन्य उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा है।”

अंजली यह भी कहती हैं,
“हाल ही में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है। अब भारत को अमेरिका पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। हमें अपनी ताकत पर भरोसा रखना चाहिए।”

अमेरिका का घमंड टूटा – नीरज और अरुण कुमार गौतम की राय

नीरज बताते हैं,
“चीन ने इस परेड के जरिए 25 देशों के नेताओं को बुलाकर अपनी ताकत का अहसास कराया। यह स्पष्ट संदेश था कि चीन किसी भी दबाव में नहीं आएगा। अमेरिका हमेशा खुद को सबसे बड़ा बताता था, लेकिन अब चीन ने अपनी ताकत दिखाकर उसका घमंड तोड़ दिया है।”

अरुण कुमार गौतम कहते हैं,
“चीन की भव्य परेड ने अमेरिका को असहज कर दिया है। अमेरिका अब खुद को सुपर पावर मानते हुए भी इस परेड के बाद सोच रहा होगा। भारत की परेड भी किसी से कम नहीं होती और उसमें भी गहरा संदेश छिपा रहता है। भारत की सैन्य शक्ति भी किसी से कम नहीं।”

चीन का उभार और भारत का नया आत्मविश्वास

चीन की हालिया विक्ट्री डे परेड ने वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ा है। अमेरिकी सुपरपावर के दावे पर इस परेड ने सवाल खड़े कर दिए हैं। मुरादाबाद के लोग मानते हैं कि अब चीन विश्व राजनीति में अमेरिका के समकक्ष खड़ा हो चुका है, लेकिन भारत भी अपनी सैन्य ताकत और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशनों के जरिए अपनी मजबूती साबित कर रहा है।

यह स्पष्ट है कि दक्षिण एशिया में अब सैन्य और राजनीतिक संतुलन बदला हुआ है, जहां अमेरिका का दबदबा कम होता जा रहा है और चीन व भारत अपनी-अपनी ताकत दिखा रहे हैं।

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