Kathua Cloudburst 2025: जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से 7 की मौत, हालात गंभीर

Kathua Cloudburst 2025: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में रविवार तड़के प्रकृति का कहर टूटा। तेज बारिश के बीच बादल फटने और भूस्खलन की दो अलग-अलग घटनाओं ने तबाही मचा दी। इस आपदा में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं। कई घर और रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

हादसा कैसे हुआ?

भारी बारिश के कारण कठुआ जिले के राजबाग और जंगलोट के जोध घाटी गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

  • जोध घाटी में बादल फटने से पांच लोगों की मौत हुई और कई घर बहाव में आ गए।

  • जंगलोट इलाके में भूस्खलन से दो लोगों की जान चली गई।

  • कई गांवों में सड़कें बंद हो गईं और जलस्तर तेजी से बढ़ गया।

मृतकों और घायलों की पहचान

कठुआ की इस त्रासदी ने कई परिवारों को उजाड़ दिया।

  • रेणु देवी (39 वर्ष) और उनकी बेटी राधिका (9 वर्ष), बगरा, जंगलोट

  • सुरमु दीन (30 वर्ष) और उनके बेटे फानू (6 वर्ष) व शेडू (5 वर्ष), जोड़े गांव

  • हबीब दीन के बेटे टाहू (2 वर्ष)

  • बशीर अहमद की बेटी ज़ुल्फान (15 वर्ष)

इन सभी की मौत अचानक आई बाढ़ और मलबे में दबने से हुई।

राहत और बचाव अभियान

जिला विकास आयुक्त राजेश शर्मा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घटनास्थल का दौरा किया और राहत कार्यों की निगरानी की।

  • एसडीआरएफ, पुलिस, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक संयुक्त रूप से बचाव कार्य कर रहे हैं।

  • कई घायल लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

  • भारी बारिश से उझ नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया है। प्रशासन ने लोगों से जलाशयों और नदियों के किनारे जाने से परहेज करने की अपील की है।

नेताओं की प्रतिक्रिया

  • मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

  • केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नागरिक प्रशासन, सेना और अर्धसैनिक बलों को तुरंत राहत और बचाव कार्यों में लगाया गया है।

  • उपराज्यपाल कार्यालय ने ट्वीट कर कहा – “यह त्रासदी स्तब्ध कर देने वाली है, प्रभावित परिवारों के साथ हमारी संवेदनाएं हैं।”

  • गृह मंत्री अमित शाह को भी राहत कार्यों की जानकारी दी गई है।

कठुआ में बादल फटने और भूस्खलन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। प्रशासन, सेना और एनडीआरएफ की टीमें लगातार मोर्चे पर डटी हुई हैं। लेकिन यह त्रासदी हमें एक बार फिर यह याद दिलाती है कि जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी घातक साबित हो सकती हैं।

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