24th july 2025
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शिव का तीसरा नेत्र सिर्फ विनाश नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और जागृति का प्रतीक भी है। जानिए इस रहस्य की गहराई और आध्यात्मिक महत्व।
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जिसने खोला तीसरा नेत्र, उसने जान लिया ब्रह्मांड का रहस्य!
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शिव के माथे पर स्थित यह नेत्र क्रोध, चेतना और दिव्य ज्ञान का प्रतीक है। यह केवल बाहर नहीं, अंदर देखने की शक्ति है।
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जब शिव ने क्रोध में तीसरा नेत्र खोला, कामदेव जलकर भस्म हो गए। यह इंद्रियों पर नियंत्रण और मोह से मुक्ति का संकेत है।
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तीसरा नेत्र हमें आंतरिक सत्य और ब्रह्मज्ञान की ओर ले जाता है। यह मन, माया और मोह के परे जाने का रास्ता दिखाता है।
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यह नेत्र ‘अजना चक्र’ का प्रतीक है जो ध्यान, अंतर्ज्ञान और आत्मिक विकास से जुड़ा है।
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ध्यान, साधना और सात्त्विक जीवन के माध्यम से व्यक्ति में भी यह शक्ति जागृत की जा सकती है।
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शिव का तीसरा नेत्र केवल विनाश नहीं, आत्म-जागृति, आत्म-नियंत्रण और ब्रह्मांडीय चेतना का संदेश देता है।
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