SCO मीटिंग में राजनाथ सिंह ने सीमा पार आतंकवाद पर दिया सख्त संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई का आह्वान किया। चीन में आयोजित इस बैठक में उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए SCO सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

एससीओ के बारे में:

  • एससीओ जिसे शंघाई सहयोग संगठन के नाम से भी जाना जाता है, एक अंतर-सरकारी राजनीतिक,आर्थिक तथा सुरक्षा गठबंधन है। इसकी उत्पत्ति 1996 में शंघाई फाइव द्वारा हुई, जिसमें चीन, रूस कजाकिस्तान, किर्गिस्तान एवं ताजिकिस्तान शामिल थे।
  • इसका प्रथम शिखर सम्मेलन 2001 में शंघाई, चीन में आयोजित किया गया था, जिसमें उज्बेकिस्तान के छठे सदस्य के रूप में शामिल होने के बाद शंघाई फाइव का नाम शंघाई सहयोग संगठन क्र दिया गया।
  • वर्ष 2017 में भारत और पाकिस्तान को इस संगठन में सदस्य के रूप में सम्मलित हुए, एवं दुशांबे में आयोजित वर्ष 2021 के शिखर वार्ता में ईरान को भी पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल कर लिया गया।
  • यह एक राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संगठन है, इसका उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में शांति, सुरक्षा व स्थिरता को बनाए रखना है।
  • एससीओ का मुख्य मूल्य शंघाई भावना है। यह आपसी विश्वास व लाभ, समानता, परामर्श, सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान और एससीओ सदस्यों के बीच आम विकास की खोज के बारे में है।

एससीओ की संगठनात्मक संरचना:

  1. एससीओ एक अंतर-सरकारी एवं सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है तथा इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते है।
  2. संगठन में समग्र रणनीतिक दिशा निर्धारित करने के लिए इसकी वार्षिक बैठक होती है एवं वार्षिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित होता है, जिसमें सदस्य बहुपक्षीय सहयोग के मुद्दों पर चर्चा करते है।
  3. एससीओ वर्तमान गतिविधियों का समन्वय और प्रबंधन करने वाला प्रमुख निकाय है।
  4. एससीओ में सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री शामिल होते है तथा यह संगठन भी विदेश नीति के समन्वय के लिए जिम्मेदार होता है।
  5. इसका सचिवालय बीजिंग, चीन में स्थित एक मुख्य स्थायी कार्यकारी निकाय है। यह एससीओ की प्रशासनिक शाखा है, जो संगठन के निर्णयों के समन्वय और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है।
  6. वर्तमान में एससीओ के 10 सदस्य देश है, जिनमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्जबेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस इत्यादि शामिल है। तथा अफगानिस्तान, और मंगोलिया के पर्यवेक्षक के रूप में सम्मिलित है ।
  7. एससीओ की आधिकारिक कामकाजी भाषा रूसी और चीनी है।

एससीओ के लक्ष्य एवं उद्देश्य:

  1. सदस्य देशों के मध्य परस्पर विश्वास और सद्भावना को मजबूत करना तथा क्षेत्रीय शांति,सुरक्षा एवं स्थिरता की रक्षा करना।
  2. एक लोकतांत्रिक न्यायसंगत अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था का निर्माण करना।
  3. इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और आपसी समर्थन को भी बढ़ावा देना है।
  4. इसका लक्ष्य राजनीतिक मामलों, अर्थशास्त्र और व्यापार, वैज्ञानिक-तकनीकी, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों के साथ-साथ ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन तथा पर्यावरण संरक्षण में सहयोग को बढ़ावा देना है।
  5. एससीओ ने अपनी पहलों जैसे की ‘शांति मिशन’ अभ्यासों के माध्यम से साझा सैन्य और सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सभी सदस्यों को शामिल करने की क्षमता का प्रदर्शन भी किया है।

एससीओ का महत्व:

  • एससीओ में एशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय एकीकरण को प्राप्त करने और सीमाओं के पार स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने की क्षमता है। इसके अतिरिक्त, एससीओ के प्रयास पुरे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना।
  • एससीओ वैश्विक जनसंख्या का 40% वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 20% और विश्व के भूभाग का 22% कवर करता है।
  • यह मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों, क्षेत्रीय आतंकवाद, जातीय अलगावाद और धार्मिक उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करना तथा क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा भी प्रदान करता है।
  • भौगोलिक महत्व के कारण एससीओ की एशिया में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है, जो इसे मध्य एशिया को नियंत्रित करने एवं क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को सीमित करने में सक्षम बनाता है।
  • मध्य एशिया यूरेनियम एवं हरित ऊर्जा स्रोतों का भंडार होने के कारण, एससीओ सदस्य देशों को ऊर्जा सुरक्षा के लिए सहयोग को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करता है।

एससीओ राजनीति, व्यापार और अर्थव्यवस्था, अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी एवं संस्कृति में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सर्वोच्च निकाय तथा आतंरिक कार्यप्रणाली और अन्य राष्ट्रों तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर पारस्परिक संपर्क एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार करने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था है। एससीओ न केवल आतंकवाद विरोध पर बल्कि मादक पदार्थो की तस्करी, सैन्य सहयोग और आर्थिक सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित करता है। यह भारत को एक ऐसे मंच में भाग लेने के लिए एक मंच प्रदान करता है जो मध्य एशियाई देशों के साथ सहयोग की अपनी परिधि को बढ़ाता है।

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