जगन्नाथ जी का रहस्यमयी रूप – एक आध्यात्मिक कथा 

30oth June 2025

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जगन्नाथ जी का अलौकिक रूप: क्यों हैं बिना हाथ-पैर के?

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भगवान जगन्नाथ का रूप पूरी दुनिया में सबसे अलग और रहस्यमयी माना जाता है।  

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उनके न तो हाथ-पैर पूर्ण होते हैं और न ही आंखों की पलकें।  

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यह वेबस्टोरी आपको बताएगी कि ऐसा रूप क्यों है, इसके पीछे क्या कथा है, और इसे देखने पर भक्तों की आत्मा क्यों जुड़ जाती है। 

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"न हाथ, न पैर... फिर भी भगवान की सबसे जीवंत मूर्ति मानी जाती है!"

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अद्वितीय रूप 

जगन्नाथ जी की मूर्ति 'दारु-ब्रह्म' से बनती है – विशेष नीम की लकड़ी जिसे खुद चुना जाता है। 

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नीम की लकड़ी से बनती है मूर्ति 

माना जाता है कि यह रूप भगवान विष्णु के स्वयं द्वारा दिया गया था – अधूरे रूप में भी पूर्ण!

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भगवान विष्णु का अवतार 

राजा इंद्रद्युम्न ने मूर्ति बनवाने का आदेश दिया था। भगवान स्वयं बढ़ई के रूप में आए। शर्त थी – मूर्ति बनते समय कोई न देखे। 

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अधूरी मूर्ति क्यों? 

जब impatient राजा ने दरवाज़ा खोला, मूर्ति अधूरी रह गई – और वही आज पूजा का मुख्य स्वरूप है! 

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अधूरी मूर्ति बन गई पूरी भक्ति की प्रतीक 

भगवान का संदेश था – ‘रूप मायने नहीं रखता, भक्ति ही सबसे बड़ा माध्यम है।’ 

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इस रूप की महिमा क्या है? 

क्या आपने कभी इस अलौकिक रूप के दर्शन किए हैं? जानिए और साझा करें ये रहस्य!  

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