भारत-पाकिस्तान के DGMO की हॉटलाइन पर बातचीत: जानिए हॉटलाइन क्या है, कैसे होती है वार्ता

भारत-पाक DGMO की आज हॉटलाइन पर बातचीत!
नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव के माहौल में एक बार फिर से DGMO (Director General of Military Operations) स्तर पर हॉटलाइन पर बातचीत की खबरें सुर्खियों में हैं। ऐसे में आम लोगों के मन में सवाल है – हॉटलाइन होती क्या है? इसका सिस्टम कैसे काम करता है? और ये बातचीत क्यों की जाती है? आइए जानते हैं सब कुछ विस्तार से।
हॉटलाइन क्या है?
हॉटलाइन एक सीधा टेलीफोनिक संपर्क माध्यम है जो दो देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच तुरंत और सीधे संवाद की सुविधा देता है। इसका मकसद आपसी तनाव कम करना, ग़लतफहमी दूर करना और सीमा पर स्थिति को नियंत्रण में रखना होता है।
हॉटलाइन की शुरुआत कब और क्यों हुई?
भारत और पाकिस्तान के बीच हॉटलाइन की शुरुआत 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद हुई थी।
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यह सिस्टम 1972 के शिमला समझौते के बाद स्थापित किया गया था।
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इसका मुख्य उद्देश्य था – “किसी भी संभावित युद्ध की स्थिति को बातचीत से टालना और तनाव को बढ़ने से रोकना।”
DGMO स्तर की बातचीत क्या होती है?
DGMO (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) दोनों देशों की सेनाओं के उच्च अधिकारी होते हैं, जो सैन्य संचालन का नेतृत्व करते हैं।
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भारत और पाकिस्तान के DGMO हर मंगलवार को रूटीन तौर पर बात करते हैं।
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लेकिन जब सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो आपातकालीन वार्ता की जाती है, जैसा कि आज हो रही है।
कैसे काम करता है यह हॉटलाइन सिस्टम?
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सुरक्षित टेलीफोन नेटवर्क का इस्तेमाल होता है जो किसी भी तरह की सेंध से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
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DGMO स्तर की यह हॉटलाइन नई दिल्ली और रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालयों को जोड़ती है।
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बातचीत की भाषा आमतौर पर अंग्रेज़ी होती है, ताकि किसी भी तरह की व्याख्या में गलती न हो।
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सभी बातचीत को रिकॉर्ड किया जाता है और बाद में दोनों पक्षों के रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट दी जाती है।
हॉटलाइन बातचीत से क्या उम्मीद?
पाकिस्तान की तरफ से हाल में हुए सीजफायर उल्लंघन और भारत की सख्त चेतावनी के बाद, DGMO स्तर की बातचीत अहम मानी जा रही है।
इससे सीमापार की गोलीबारी और ड्रोन हमलों को लेकर तनाव कम करने, समझौते के नियम तय करने और भविष्य की कार्रवाई पर संवाद हो सकता है।
हॉटलाइन प्रणाली भारत-पाकिस्तान जैसे परमाणु संपन्न देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य संतुलन बनाए रखने का एक अहम औजार है। जब दोनों देशों के DGMO आज बात करेंगे, तो यह सिर्फ बातचीत नहीं बल्कि सैन्य रणनीति, संयम और शांति की दिशा में एक बड़ा कदम भी हो सकता है।
