शाहिद रफ़ी का बड़ा आरोप: लता मंगेशकर और आशा भोसले ने ईर्ष्या में किया रफ़ी साहब का करियर बर्बाद?

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हिंदी संगीत जगत में मोहम्मद रफ़ी का नाम अमर है। उनकी आवाज़ को लोग आज भी सराहते हैं और सुनते हैं। लेकिन हाल ही में उनके बेटे शाहिद रफ़ी ने एक चौंकाने वाला बयान देकर संगीत जगत में हलचल मचा दी है।

शाहिद रफ़ी ने सीधे तौर पर लता मंगेशकर और उनकी बहन आशा भोसले पर आरोप लगाया है कि ईर्ष्या और असुरक्षा की वजह से उन्होंने रफ़ी साहब का करियर प्रभावित किया।

गिनीज रिकॉर्ड पर विवाद

पत्रकार विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में शाहिद ने कहा कि जब मोहम्मद रफ़ी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया जाने वाला था, तब लता मंगेशकर ने हस्तक्षेप किया। शाहिद का दावा है कि महिलाओं की ओर से ईर्ष्या और विरोध ही उनके पिता के करियर में ब्रेक का कारण बना।

“लता जी असुरक्षित थीं” – शाहिद रफ़ी

शाहिद ने कहा – “लता मंगेशकर को यह बर्दाश्त नहीं होता था कि रफ़ी साहब उनसे ऊपर हैं। उन्हें नंबर वन रहना था। मैंने सुना था कि वे नौ साल तक घर पर बैठी रहीं और कहती थीं कि रफ़ी साहब का करियर खत्म हो रहा है। लेकिन 70 के दशक के उनके गाने सुन लीजिए, वो सच बयान कर देंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता का यह ब्रेक किसी और वजह से नहीं बल्कि मजबूरन थोपा गया था।

शाहिद रफ़ी का बड़ा आरोप: लता मंगेशकर और आशा भोसले ने ईर्ष्या में किया रफ़ी साहब का करियर बर्बाद

आशा भोसले को सुनाई खरी-खरी

शाहिद ने आशा भोसले के उस कथित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था कि “रफ़ी साहब में रेंज नहीं है।”

उन्होंने कहा – “यह कहना शर्मनाक है। आप पढ़ी-लिखी इंसान हैं, थोड़ा सोच-समझकर बोलना चाहिए। इस उम्र में ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं। ऊपर वाला सब देख रहा है। मेरे पिता के बारे में कोई गलत बोलेगा तो मैं चुप नहीं बैठूंगा।”

“कभी बर्दाश्त नहीं करूंगा…”

शाहिद ने साफ कहा कि वे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे कि कोई उनके पिता के खिलाफ बोले। उन्होंने दावा किया कि लता मंगेशकर ने खुद रफ़ी साहब से माफी मांगी थी, जब उनके करियर पर असर पड़ा।

रफ़ी साहब की विरासत

मोहम्मद रफ़ी ने 1940 से 1980 के दशक तक हजारों गाने गाए और उन्हें ‘गोल्डन वॉइस ऑफ इंडिया’ कहा गया। उनका करियर और उनकी आवाज़ को लेकर यह विवाद नया मोड़ जरूर देता है, लेकिन यह तय है कि आज भी उनके गाने हर संगीतप्रेमी के दिल में बसे हुए हैं।

यह खबर संगीत जगत में कई नए सवाल खड़े करती है। क्या सचमुच लता मंगेशकर और आशा भोसले के चलते रफ़ी साहब का करियर प्रभावित हुआ? या यह महज़ एक गलतफहमी है?

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